तीसरी सीढ़ी — यदि अभ्यास भी न हो सके, तो मेरे लिए कर्म करो। घर का काम करो — पर मेरे लिए करो। खेत में जाओ — पर मेरे नाम पर जाओ। सेवा करो — पर उसे मेरी सेवा मानकर करो। इस भाव से कर्म करने पर भी सिद्धि मिलती है।
यह बहुत व्यावहारिक उपाय है। जो साधना में नहीं बैठ सकता, जो मन को नहीं रोक सकता — वह भी अपने दैनिक जीवन में ही भक्ति कर सकता है। बस भाव बदलना है — यह काम कृष्ण के लिए है।