कृष्ण कहते हैं — न वेदों से, न तप से, न दान से, न यज्ञ से — जैसे तुमने इस रूप में मुझे देखा है, वैसे देखना संभव नहीं है।
यह श्लोक 11.48 का भाव दोहराता है — लेकिन अब इसके बाद सीधे उत्तर आएगा। अगले श्लोक (11.54) में कृष्ण बताएंगे — किससे दिखता है? केवल अनन्य भक्ति से।