कृष्ण कहते हैं — मेरा यह रूप जो तुमने देखा, वह देखने में अत्यंत कठिन है। देवता भी सदा इस रूप के दर्शन की कामना करते रहते हैं।
यह कृष्ण का अर्जुन को बताना है कि उन्होंने कोई साधारण दर्शन नहीं किया। देवता भी जिसे तरसते हैं, वह अर्जुन को मिला — यह उनकी भक्ति का फल है।