संजय बताते हैं — वासुदेव ने यह कहकर अर्जुन को अपना पहले वाला सामान्य रूप फिर दिखाया। उस महात्मा ने सौम्य रूप धारण करके भयभीत अर्जुन को आश्वस्त किया।
यह अध्याय का एक भावनात्मक शिखर है — विराट से सौम्य तक की यात्रा। जैसे आँधी के बाद शांत हवा आती है।
संजय बताते हैं — वासुदेव ने यह कहकर अर्जुन को अपना पहले वाला सामान्य रूप फिर दिखाया। उस महात्मा ने सौम्य रूप धारण करके भयभीत अर्जुन को आश्वस्त किया।
यह अध्याय का एक भावनात्मक शिखर है — विराट से सौम्य तक की यात्रा। जैसे आँधी के बाद शांत हवा आती है।
यह अनुष्टुप् छंद का श्लोक है। संजय यहाँ फिर कथावाचक की भूमिका में आते हैं।
अगले श्लोक (11.51) में अर्जुन राहत की साँस लेते हुए कहेंगे — अब मन स्थिर हो गया, सामान्य अवस्था लौट आई।