📿 श्लोक संग्रह

इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा

गीता 11.50 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 11 — विश्वरूपदर्शनयोग
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः ।
आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा ॥
वासुदेवः तथोक्त्वा
वासुदेव ने ऐसा कहकर
स्वकं रूपम् दर्शयामास
अपना रूप दिखाया
भीतम् एनम् आश्वासयामास
भयभीत अर्जुन को आश्वस्त किया
सौम्यवपुः महात्मा
सौम्य रूप वाले महात्मा

संजय बताते हैं — वासुदेव ने यह कहकर अर्जुन को अपना पहले वाला सामान्य रूप फिर दिखाया। उस महात्मा ने सौम्य रूप धारण करके भयभीत अर्जुन को आश्वस्त किया।

यह अध्याय का एक भावनात्मक शिखर है — विराट से सौम्य तक की यात्रा। जैसे आँधी के बाद शांत हवा आती है।

यह अनुष्टुप् छंद का श्लोक है। संजय यहाँ फिर कथावाचक की भूमिका में आते हैं।

अगले श्लोक (11.51) में अर्जुन राहत की साँस लेते हुए कहेंगे — अब मन स्थिर हो गया, सामान्य अवस्था लौट आई।

अध्याय 11 · 50 / 55
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