कृष्ण कोमलता से कहते हैं — मेरा यह भयानक रूप देखकर व्यथित मत हो, घबराओ मत। भय से मुक्त होकर, प्रसन्न मन से — वही मेरा पहले वाला रूप देखो।
यह कृष्ण की करुणा है। वे जानते हैं कि अर्जुन भयभीत हैं। वे स्वयं उन्हें आश्वस्त करते हैं — यही भगवान का भक्त-वत्सल स्वभाव है।