अर्जुन शरीर झुकाकर कहते हैं — हे देव, हे स्तुतियोग्य ईश्वर, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ। जैसे पिता पुत्र को, मित्र मित्र को, प्रेमी प्रियजन को क्षमा करता है — वैसे ही आप भी सहन करें।
तीन उपमाएं — पिता-पुत्र, मित्र-मित्र, प्रेमी-प्रिया — यह तीन प्रकार के निकट संबंध हैं। अर्जुन कृष्ण से इन तीनों संबंधों की गर्माहट के साथ क्षमा माँग रहे हैं।