अर्जुन एक सुंदर उपमा देते हैं — जैसे नदियों के अनेक जलप्रवाह समुद्र की ओर बहते हैं, वैसे ही मनुष्यलोक के ये वीर योद्धा आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं।
यह उपमा बहुत सटीक है। नदी का पानी समुद्र में जाकर खो नहीं जाता — वह समुद्र का हिस्सा बन जाता है। वैसे ही ये प्राणी काल में विलीन होकर परमात्मा का हिस्सा बन जाते हैं।