📿 श्लोक संग्रह

अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः

गीता 11.26 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 11 — विश्वरूपदर्शनयोग
अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः ।
भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः ॥
धृतराष्ट्रस्य पुत्राः
धृतराष्ट्र के पुत्र
अवनिपालसङ्घैः
राजाओं के समूह के साथ
सूतपुत्रः
सूत-पुत्र (कर्ण)
अस्मदीयैः योधमुख्यैः
हमारे मुख्य योद्धाओं के साथ भी

अर्जुन देखते हैं — धृतराष्ट्र के सभी पुत्र, राजाओं के समूह सहित, भीष्म, द्रोण, सूत-पुत्र (कर्ण) — और हमारे अपने मुख्य योद्धा भी — सब आपके भयानक मुखों में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं।

यह दृश्य बताता है कि युद्ध का परिणाम पहले से तय है। काल के सामने मित्र और शत्रु का भेद नहीं है।

यह त्रिष्टुप् छंद का श्लोक है। 11.26 और 11.27 मिलकर एक पूरा दृश्य बनाते हैं — योद्धाओं का विराट मुखों में प्रवेश।

अगले श्लोक (11.27) में अर्जुन इस भयावह दृश्य का पूर्ण वर्णन करेंगे।

अध्याय 11 · 26 / 55
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