अर्जुन कहते हैं — हे देव, मैं आपके शरीर में सब देवताओं को देख रहा हूँ, सब प्राणियों के समूहों को देख रहा हूँ। कमल के आसन पर बैठे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, सब ऋषि और दिव्य नाग — सब दिख रहे हैं।
यह त्रिष्टुप् छंद में लिखा श्लोक है — इसमें पंक्तियाँ अपेक्षाकृत लंबी हैं। अर्जुन की वाणी विस्तार से उस दृश्य को समेटने की कोशिश कर रही है।