मृत्यु को भी परमात्मा की विभूति कहा गया है — 'सर्वहर' — जो सब कुछ हर लेती है। और साथ ही 'उद्भव' — नए की उत्पत्ति भी। मृत्यु और जन्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं — दोनों में परमात्मा हैं। यह भाव मन को मृत्यु-भय से मुक्त करता है।
फिर सात स्त्री-गुण गिनाए गए — कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति, क्षमा। ये सब स्त्रीलिंग शब्द हैं और इन्हें 'नारीणाम्' कहा गया है। ये गुण जहाँ भी प्रकट हों — पुरुष में हों या स्त्री में — वे परमात्मा की विभूतियाँ हैं।