प्रह्लाद — हिरण्यकशिपु का पुत्र, जो दैत्य कुल में जन्मा लेकिन विष्णु का परम भक्त था। कृष्ण कहते हैं — दैत्यों में मैं प्रह्लाद हूँ। यानी दुर्जन कुल में भी जो श्रेष्ठता और भक्ति प्रकट होती है, वह परमात्मा की विभूति है।
काल — समय, जो सब कुछ गिनता है और सब कुछ बदलता है। सिंह — पशुओं का राजा। गरुड — विष्णु का वाहन, पक्षियों में सबसे शक्तिशाली। इन सबमें एक बात समान है — वे अपने वर्ग में सबसे प्रबल हैं। उस प्रबलता में परमात्मा दिखते हैं।