📿 श्लोक संग्रह

अनन्तश्चास्मि नागानाम्

गीता 10.29 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 10 — विभूतियोग
अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम् ।
पितॄणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम् ॥
अनन्तः च अस्मि
अनंत हूँ
नागानाम्
नागों में
वरुणः
वरुण
यादसाम् अहम्
जलचरों में मैं
पितॄणाम्
पितरों में
अर्यमा च अस्मि
अर्यमा हूँ
यमः
यम
संयमताम् अहम्
नियंत्रण करने वालों में मैं

अनंत — शेषनाग, जो विष्णु का आसन है और पृथ्वी को धारण करते हैं। नागों में सबसे प्रमुख। वरुण — जल के देवता, जो समुद्र में रहने वाले जीवों के स्वामी हैं। दोनों में परमात्मा की उपस्थिति।

पितरों में अर्यमा — पितृ-लोक के प्रमुख देव। और संयम करने वालों में यम — जो मृत्यु के देव हैं और धर्म के पालक भी। यम को यहाँ नकारात्मक नहीं, बल्कि नियंत्रण की शक्ति के रूप में देखा गया है। मृत्यु भी परमात्मा की विभूति है।

यम का उल्लेख गीता में महत्वपूर्ण है। कठोपनिषद में यम ही नचिकेता को मृत्यु और आत्मा का ज्ञान देते हैं। यहाँ 10.29 में उन्हें विभूति बताना उसी परंपरा से जुड़ता है।

अनंत शेषनाग की कथा भागवत पुराण में विस्तार से है। शेषनाग पर विष्णु का विश्राम और पृथ्वी को धारण करना — दोनों परमात्मा के असीमित स्वरूप के प्रतीक हैं।

अध्याय 10 · 29 / 42
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