चार वेदों में सामवेद संगीत का वेद है — उसमें मंत्र गाए जाते हैं, केवल पढ़े नहीं जाते। कृष्ण कहते हैं मैं सामवेद हूँ — शायद इसलिए कि संगीत में भाव सबसे सीधे हृदय तक पहुँचता है। देवों में इंद्र — जो सबका राजा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात इस श्लोक में है — 'भूतानामस्मि चेतना।' प्राणियों में मैं चेतना हूँ। चेतना वह है जो जागती है, जो देखती है, जो जानती है। हर प्राणी की यह जानने की शक्ति — वही परमात्मा है।