यह श्लोक बड़ी विनम्र स्वीकृति की बात करता है। देवता और महर्षि — जो ज्ञान और शक्ति में सबसे ऊपर माने जाते हैं — वे भी कृष्ण के मूल को नहीं जान सकते। कारण बहुत सीधा है: कृष्ण ही उन सबके आदि हैं। जो सबसे पहले है, उसकी उत्पत्ति कोई नहीं जान सकता।
यहाँ 'सर्वशः' शब्द है — हर प्रकार से। अर्थात् कृष्ण केवल समय में आदि नहीं हैं, बल्कि शक्ति में, ज्ञान में, सत्ता में — हर दिशा से वे मूल हैं। यह अध्याय इसी विस्तार को उदाहरण देकर समझाएगा।