यह श्लोक गीता के सबसे मीठे वचनों में से एक है। कृष्ण कहते हैं — जो लोग प्रेम से, निरंतर मेरी भक्ति में लगे हैं, उन्हें मैं स्वयं वह बुद्धि देता हूँ जिससे वे मुझे पा सकें। यानी साधक को केवल लगे रहना है — बाकी काम भगवान करते हैं। यह गीता का अनुग्रह का सिद्धांत है।
'प्रीतिपूर्वकम्' — प्रेम के साथ। यह एक शर्त नहीं, एक गुण है। जब भक्ति में प्रेम होता है, तो वह सच्ची होती है। ऐसे भक्त को कृष्ण बुद्धि देते हैं — यह बुद्धि किताबी नहीं है, भीतर से जागने वाली समझ है।