अर्जुन कहते हैं कि वर्णसंकर होने से कुल को नष्ट करने वालों और उनके कुल दोनों को नरक की प्राप्ति होती है। इनके पूर्वज भी गिर जाते हैं क्योंकि उनका पिण्डदान और जल-तर्पण बंद हो जाता है।
भारतीय परम्परा में पितरों को पिण्डदान और तर्पण देना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वैसे ही है जैसे आज भी हम अपने बड़ों की याद में श्रद्धांजलि देते हैं और उनकी स्मृति को जीवित रखते हैं। अर्जुन की चिन्ता है कि यदि कुल ही नष्ट हो जाएगा, तो पितरों की सेवा कौन करेगा?
यह एक बहुत व्यावहारिक चिन्ता है — जब परिवार टूटता है, तो पुरानी पीढ़ियों की यादें और परम्पराएँ भी खो जाती हैं।