अर्जुन कहते हैं — हे कृष्ण, अधर्म के बढ़ने से कुल की स्त्रियाँ भ्रष्ट हो जाती हैं, और जब स्त्रियाँ पथभ्रष्ट होती हैं तो वर्णसंकर उत्पन्न होता है — अर्थात कुल की परम्पराएँ टूट जाती हैं।
अर्जुन के समय में परिवार की व्यवस्था और परम्पराओं की रक्षा का बहुत महत्व था। जब युद्ध में पुरुष मारे जाते हैं, तो परिवार बिखर जाते हैं और सामाजिक ढाँचा कमज़ोर पड़ जाता है। अर्जुन यही चिन्ता व्यक्त कर रहे हैं।
सरल शब्दों में कहें तो अर्जुन कह रहे हैं कि युद्ध से केवल रणभूमि पर नहीं, घरों में भी तबाही आती है। जब रक्षक ही न रहें तो घर-परिवार की व्यवस्था कैसे बनी रहेगी?