अब पाण्डव पक्ष के शंखों के नाम आते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया — यह शंख पञ्चजन नामक दैत्य को मारकर प्राप्त किया गया था। अर्जुन ने अपना देवदत्त शंख बजाया — यह देवताओं द्वारा प्रदान किया गया दिव्य शंख था।
भीम ने अपना पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया। भीम को यहाँ दो विशेषणों से पुकारा गया है — "भीमकर्मा" अर्थात भयंकर कार्य करने वाला, और "वृकोदर" अर्थात भेड़िये जैसे पेट वाला। भीम अपनी अपार शारीरिक शक्ति और भूख दोनों के लिए जाने जाते थे।
तीन शंखों की ध्वनि — पाञ्चजन्य, देवदत्त और पौण्ड्र — यह पाण्डव पक्ष के तीन सबसे शक्तिशाली योद्धाओं का परिचय है। कृष्ण भगवान हैं, अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हैं, और भीम सबसे बलवान योद्धा। इन तीनों के शंखनाद से कौरव सेना में कम्पन हो गया होगा।