दुर्योधन अपने सेनापतियों को आदेश देता है — "आप सभी अपने-अपने मोर्चों पर अपने निर्धारित स्थानों पर खड़े रहें और सबसे महत्वपूर्ण बात — भीष्म पितामह की चारों ओर से रक्षा करें।"
दुर्योधन जानता था कि भीष्म पितामह कौरव सेना की रीढ़ हैं। जब तक भीष्म खड़े हैं, कौरव सेना अजेय है। इसलिए वह सबको यह आदेश देता है कि भीष्म की सुरक्षा सबसे पहले है। यह एक अच्छी सैन्य रणनीति है — अपने सबसे शक्तिशाली योद्धा की रक्षा करना।
लेकिन इसमें एक विडम्बना भी है। भीष्म स्वयं इतने शक्तिशाली थे कि उन्हें किसी की रक्षा की आवश्यकता नहीं थी। दुर्योधन का यह आदेश उसकी अपनी असुरक्षा को ही दर्शाता है — वह डरता है कि कहीं पाण्डव भीष्म को पहले न गिरा दें।