📚 पंचतंत्र

तीन ठग और बकरा

6+ ~4 मिनट विष्णु शर्मा के पंचतंत्र से
📖 विष्णु शर्मा — पंचतंत्र

एक ब्राह्मण था। वह एक बकरा खरीदकर घर ले जा रहा था। बकरे को कंधे पर उठाए वह राह पर चला जा रहा था।

रास्ते में तीन ठग थे। उन्होंने ब्राह्मण को देखा। उनके मन में तरकीब आई। पहले ठग ने आगे बढ़कर कहा — 'पंडित जी, यह आप कंधे पर कुत्ता उठाए जा रहे हो?'

ब्राह्मण बोला — 'अरे, यह बकरा है, कुत्ता नहीं!' वह आगे चला गया। पर उसके मन में हल्का-सा संदेह आ गया।

थोड़ी दूर पर दूसरा ठग मिला। उसने भी वही कहा — 'पंडित जी, यह श्वान क्यों उठाया है?' ब्राह्मण रुक गया। उसने बकरे को देखा। 'यह बकरा है' — पर अब उसकी आवाज़ में यकीन कम था।

तीसरे ठग ने थोड़ा आगे फिर यही कहा। इस बार ब्राह्मण का मन डोल गया। 'तीन लोगों ने कहा — शायद यह सच में कुत्ता ही हो!'

उसने बकरे को नीचे रख दिया और भाग गया। ठग खुश हुए। बकरा ले गए।

जो बात बार-बार कही जाए, वह चाहे झूठ हो — मन में घर करने लगती है। यही ठगों की चाल थी।

पंचतंत्र · 13 / 15
💡 इस कहानी की सीख
बार-बार कही गई बात झूठ होने पर भी सच की तरह लगने लगती है — सावधान रहो।
पंचतंत्र की यह कथा बताती है कि एक ही बात को अलग-अलग मुँह से सुनने पर मन उस पर भरोसा करने लगता है। ब्राह्मण को पता था कि उसके कंधे पर बकरा है — फिर भी तीन बार सुनकर उसका विश्वास डोल गया। किसी की बात को परखे बिना मान लेना बुद्धिमानी नहीं।
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