एक बार एक सियार जंगल में घूम रहा था। उसे बड़ी भूख लगी थी। तभी उसे एक जगह चार मरे हुए जानवर दिखे — एक हिरन, एक सूअर, एक साँप और एक शिकारी।
सियार ने सोचा — 'इतना भोजन! यह तो बड़े दिनों का खाना है।' उसके मन में लालच आया। उसने सोचा — 'अभी नहीं खाता। पहले इसे बचाकर रखता हूँ। शुरुआत धनुष की डोरी से करता हूँ।'
'धनुष की डोरी चबा लूँगा, तो वह भी मिल जाएगी। पहले छोटी चीज़ से शुरू करो, बड़ा बाद में।' यह उसकी गज़ब की 'बुद्धि' थी।
उसने धनुष की डोरी चबाना शुरू किया। जैसे ही उसने दाँत गड़ाए, डोरी टूट गई। धनुष की कमान ज़ोर से सीधी हुई। उसका एक नुकीला सिरा सियार के पेट में घुस गया।
सियार वहीं गिर पड़ा। सामने इतना भोजन पड़ा था। पर वह एक कौर भी नहीं खा सका।
जो सामने था, उसे छोड़कर जो नहीं था, उसकी जुगत में लगा रहा — यही उसकी गलती थी।