📚 पंचतंत्र

धोबी का गधा

6+ ~4 मिनट विष्णु शर्मा के पंचतंत्र से
📖 विष्णु शर्मा — पंचतंत्र

एक धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा दिनभर कपड़े ढोता था। वह थका-माँदा रहता था। उसे खाने को भी कम मिलता था।

धोबी के पास एक बाघ की खाल भी थी। उसे एक दिन एक तरकीब सूझी। उसने गधे पर बाघ की खाल डाल दी। अब गधा दूर से बाघ जैसा दिखता था।

धोबी उसे रात को खेतों में छोड़ देता। किसान और उनके परिवार डर जाते। कोई भी गधे को भगाने नहीं आता। गधा रात-भर हरी फ़सल चरता रहता।

कुछ दिन यह चाल चलती रही। गधा मोटा होने लगा। धोबी खुश था।

पर एक रात गधे ने दूर से एक गधी की आवाज़ सुनी। वह खुश हो गया। उसने ज़ोर से रेंकना शुरू किया — ढेंचूँ... ढेंचूँ।

किसानों ने आवाज़ सुनी। वे समझ गए। यह तो गधा है! वे लाठियाँ लेकर दौड़े आए। गधे की खूब पिटाई हुई।

बाघ की खाल ओढ़ने से कोई बाघ नहीं बनता। असली स्वभाव छुपाए नहीं छुपता।

पंचतंत्र · 9 / 15
💡 इस कहानी की सीख
ऊपरी वेश चाहे जैसा हो, अपना स्वभाव एक दिन ज़रूर बोल उठता है।
पंचतंत्र की यह कथा बताती है कि दिखावे की एक सीमा होती है। असली पहचान देर-सवेर सामने आ ही जाती है। गधे ने खाल ओढ़ ली, पर उसकी आवाज़ छुप न सकी। स्वभाव को बदलने के बिना केवल वेश बदलने से काम नहीं चलता।
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