📚 कृष्ण लीला

कृष्ण जन्म

5+ ~5 मिनट भागवत पुराण से
📖 भागवत पुराण — दशम स्कंध

भागवत पुराण के अनुसार, बहुत पुराने समय की बात है। मथुरा नगरी में राजा कंस का राज था। कंस बड़ा अत्याचारी था। उसने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था।

आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवाँ पुत्र कंस का वध करेगा। इसलिए कंस ने देवकी के छः बच्चों को जन्म लेते ही मार डाला। देवकी और वसुदेव बहुत दुखी रहते थे। पर उनका धैर्य नहीं टूटा।

भादों मास की अष्टमी की अधेरी रात थी। घनघोर बादल छाए थे। बारिश हो रही थी। उसी आधी रात को देवकी के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ। भागवत पुराण में वर्णित है कि उस क्षण कारागार में दिव्य प्रकाश भर गया।

वसुदेव ने शिशु को देखा। उनके मन में एक संदेश आया। गोकुल गाँव में उनके मित्र नंद बाबा के घर उसी रात एक कन्या का जन्म हुआ था। वसुदेव को अपने शिशु को वहाँ पहुँचाना था।

कारागार के द्वार अपने आप खुल गए। पहरेदार सो गए। वसुदेव ने शिशु को एक टोकरी में रखा। टोकरी को सिर पर उठाया और चल पड़े। रात का अँधेरा था। यमुना नदी उफान पर थी।

वसुदेव ने यमुना में कदम रखा। नदी गहरी थी पर वे रुके नहीं। भागवत पुराण कहता है कि शेषनाग ने उनके ऊपर अपना फन फैला दिया — जैसे एक छत हो। यमुना का पानी धीरे-धीरे उतरता गया। वसुदेव पार हो गए।

गोकुल पहुँचकर वसुदेव ने नंद बाबा के घर में अपना शिशु यशोदा माँ के पास रख दिया। वहाँ सोई हुई कन्या को उठाया और वापस मथुरा आ गए। कारागार के द्वार फिर बंद हो गए।

सुबह जब कंस को पता चला कि देवकी ने कन्या को जन्म दिया है, वह उसे लेने आया। पर वह कन्या उसके हाथ से छूट गई और आकाश में चली गई। उसी क्षण एक देव-वाणी गूँजी — 'तुम्हारा काल जन्म ले चुका है।' कंस काँप गया।

इधर गोकुल में यशोदा माँ ने उस सुंदर शिशु को गले से लगा लिया। घर में दीपक जल उठे। नंद बाबा की आँखें खुशी से भर आईं। वह बच्चा — जिसे सारा गोकुल कन्हैया, गोपाल, और श्रीकृष्ण कहकर पुकारने वाला था — वह अब अपने घर पहुँच चुका था।

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💡 इस कहानी की सीख
जब रात सबसे गहरी हो, तब भी नई सुबह आती है।
यह कथा बताती है कि अत्याचार कितना भी बड़ा हो, वह हमेशा नहीं टिकता। वसुदेव और देवकी ने धैर्य नहीं छोड़ा। और उनके धैर्य की रात में ही एक नया उजाला जन्म लेने आया।
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