📿 श्री रुद्रम्

चमकम् — अनुवाक 3

श्री रुद्रम् · 14 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
शं च मे मयश्च मे प्रियं च मेऽनुकामश्च मे ।
शम्
शान्ति
मयः
सुख
प्रियम्
प्रिय वस्तु
अनुकामः
इच्छापूर्ति
मुझे शान्ति मिले, सुख मिले, प्रिय वस्तुएँ मिलें और इच्छाओं की पूर्ति हो।
मन्त्र 2
कामश्च मे सौमनसश्च मे भद्रं च मे श्रेयश्च मे ।
कामः
कामना
सौमनसः
प्रसन्न मन
भद्रम्
कल्याण
श्रेयः
श्रेष्ठता
मुझे शुभ कामनाएँ पूर्ण हों, मन प्रसन्न रहे, कल्याण हो और श्रेष्ठता मिले।
मन्त्र 3
वसीयश्च मे यशश्च मे भगश्च मे द्रविणं च मे ।
वसीयः
उत्तम निवास
यशः
यश
भगः
ऐश्वर्य
द्रविणम्
धन
मुझे उत्तम निवास मिले, यश मिले, ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति हो।
मन्त्र 4
यन्ता च मे धर्ता च मे क्षेमश्च मे धृतिश्च मे ।
यन्ता
नियन्त्रक
धर्ता
धारण करने वाला
क्षेमः
सुरक्षा
धृतिः
धैर्य
मुझे नियन्त्रण शक्ति मिले, धारण शक्ति मिले, सुरक्षा और धैर्य मिले।
मन्त्र 5
विश्वं च मे महश्च मे संवित्च मे ज्ञात्रं च मे ।
विश्वम्
सम्पूर्ण (विश्व)
महः
महानता
संवित्
ज्ञान, चेतना
ज्ञात्रम्
ज्ञान का साधन
मुझे सम्पूर्णता मिले, महानता मिले, चेतना और ज्ञान का साधन मिले।
मन्त्र 6
सूश्च मे प्रसूश्च मे सीरं च मे लयश्च मे ।
सूः
प्रसव (उत्पत्ति)
प्रसूः
सन्तान
सीरम्
हल
लयः
विश्राम
मुझे सन्तान उत्पत्ति का सुख मिले, सन्तान मिले, हल (कृषि साधन) और विश्राम मिले।

तृतीय अनुवाक में शान्ति, सुख, यश, धन, धैर्य, ज्ञान और सन्तान — जीवन के समस्त पक्षों की प्रार्थना है। चमकम् भौतिक और आध्यात्मिक दोनों आवश्यकताओं को समान महत्त्व देता है।

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