📿 श्री रुद्रम्

चमकम् — अनुवाक 1

श्री रुद्रम् · 12 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
अग्नाविष्णू सजोषसेमा वर्धन्तु वां गिरः ।
द्युम्नैर्वाजेभिरागतम् ॥
अग्नाविष्णू
अग्नि और विष्णु
सजोषसा
मिलकर
वर्धन्तु
बढ़ाएँ
गिरः
स्तुतियाँ
द्युम्नैः
तेज से
वाजेभिः
अन्न (बल) से
अग्नि और विष्णु मिलकर हमारी स्तुतियों को बढ़ाएँ। वे तेज और बल लेकर आएँ।
मन्त्र 2
वाजश्च मे प्रसवश्च मे प्रयतिश्च मे प्रसितिश्च मे धीतिश्च मे क्रतुश्च मे ।
वाजः
अन्न (बल)
प्रसवः
प्रेरणा
प्रयतिः
प्रयत्न
प्रसितिः
बन्धन से मुक्ति
धीतिः
बुद्धि
क्रतुः
संकल्प शक्ति
मुझे अन्न (बल) मिले, प्रेरणा मिले, प्रयत्न की शक्ति मिले, बन्धन से मुक्ति मिले, बुद्धि मिले और संकल्प शक्ति मिले।
मन्त्र 3
स्वरश्च मे श्लोकश्च मे श्रावश्च मे श्रुतिश्च मे ।
स्वरः
वेद-स्वर
श्लोकः
यश
श्रावः
श्रवण शक्ति
श्रुतिः
वेद ज्ञान
मुझे वेद-स्वर मिले, यश मिले, श्रवण शक्ति मिले और वेद ज्ञान मिले।
मन्त्र 4
ज्योतिश्च मे सुवश्च मे प्राणश्च मेऽपानश्च मे ।
ज्योतिः
प्रकाश
सुवः
स्वर्ग
प्राणः
प्राणवायु
अपानः
अपानवायु
मुझे प्रकाश मिले, स्वर्गलोक मिले, प्राणवायु और अपानवायु सुचारु रहें।
मन्त्र 5
व्यानश्च म उदानश्च मे समानश्च मे ।
व्यानः
व्यानवायु (सर्वव्यापी प्राण)
उदानः
उदानवायु (ऊर्ध्वगामी प्राण)
समानः
समानवायु (पाचन प्राण)
मुझे व्यानवायु, उदानवायु और समानवायु — ये तीनों प्राण सुचारु मिलें।
मन्त्र 6
चित्तं च म आधीतं च मे वाक्च मे मनश्च मे चक्षुश्च मे श्रोत्रं च मे ।
चित्तम्
चित्त (मन)
आधीतम्
अध्ययन किया हुआ ज्ञान
वाक्
वाणी
मनः
मन
चक्षुः
नेत्र
श्रोत्रम्
कान
मुझे चित्त की एकाग्रता मिले, पढ़ा हुआ ज्ञान स्थिर रहे, वाणी-मन-नेत्र-कान सब सुचारु रहें।

चमकम् का प्रथम अनुवाक 'च मे' (और मुझे मिले) शैली में याचनाओं की श्रृंखला है। यहाँ भक्त बल, बुद्धि, प्राणशक्ति, इन्द्रियाँ और ज्ञान माँगता है। 'च मे' का बार-बार आना ही चमकम् नाम का कारण है।

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