📿 श्री रुद्रम्

नमकम् — अनुवाक 6

श्री रुद्रम् · 6 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
नमो वञ्चते च परिवञ्चते च ।
वञ्चते
गतिशील (चलने वाले) को
परिवञ्चते
चारों ओर विचरने वाले को
गतिशील और चारों ओर विचरने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 2
नमो स्तायूनां पतये च ।
स्तायूनाम्
चोरों (गुप्तचरों) के
पतये
स्वामी को
गुप्तचरों और छिपकर चलने वालों के स्वामी रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 3
नमो निचेरवे परिचराय च ।
निचेरवे
रात में विचरने वाले को
परिचराय
चारों ओर सेवा करने वाले को
रात्रि में विचरने वाले और सर्वत्र सेवा करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 4
नमः सृकाविभ्यो जिघांसद्भ्यश्च वो नमः ।
सृकाविभ्यः
शूल (भाला) धारण करने वालों को
जिघांसद्भ्यः
वध करने की इच्छा रखने वालों को
शूल धारण करने वाले और शत्रुसंहार की इच्छा रखने वाले रुद्रगणों को नमस्कार है।
मन्त्र 5
नमो भवाय च रुद्राय च ।
भवाय
संसार के कारण रूप शिव को
रुद्राय
दुःख हरने वाले रुद्र को
संसार के मूल कारण भव और दुःखों को हरने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 6
नमः शर्वाय च पशुपतये च ।
शर्वाय
संहारकर्ता को
पशुपतये
समस्त प्राणियों के स्वामी को
संहारकर्ता शर्व और समस्त प्राणियों के स्वामी पशुपति को नमस्कार है।
मन्त्र 7
नम उग्राय च भीमाय च ।
उग्राय
उग्र (प्रचण्ड) रूप वाले को
भीमाय
भयंकर रूप वाले को
उग्र और भीम (भयंकर) रूप वाले रुद्र को नमस्कार है।

छठे अनुवाक में रुद्र के विभिन्न नामों — भव, रुद्र, शर्व, पशुपति, उग्र, भीम — से स्तुति की गई है। ये सभी शिव के प्रसिद्ध अष्टमूर्ति नामों में से हैं।

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