कृष्ण कहते हैं — मैं अपनी प्रकृति का आश्रय लेकर इस सारे प्राणि-समूह को बार-बार प्रकट करता हूँ। ये सब प्राणी प्रकृति के वश में हैं — स्वयं की इच्छा से नहीं आते।
यह श्लोक बताता है कि जन्म-मृत्यु का यह चक्र किसी की सज़ा नहीं है — यह बस प्रकृति का स्वभाव है। जब तक जीव प्रकृति से ऊपर नहीं उठता, वह इस चक्र में रहता है।