यह गीता के सबसे साहसी और उदार वचनों में से एक है। भगवान कहते हैं — यदि कोई बहुत बुरे आचरण वाला भी हो, पर वह अनन्य भाव से मुझे भजता है — तो उसे साधु मानो।
क्यों? — क्योंकि उसने सही निश्चय किया। जिस क्षण कोई अनन्य भक्ति का मार्ग चुनता है — उसी क्षण से उसकी यात्रा बदल जाती है। पुराना आचरण धुलने लगता है।