कृष्ण कहते हैं — जो इस ज्ञान पर श्रद्धा नहीं रखते, वे मुझे पाए बिना ही लौट जाते हैं। वे जन्म और मृत्यु के चक्र में बने रहते हैं।
श्रद्धा यहाँ आँखें मूँद कर मान लेने की बात नहीं है। श्रद्धा का अर्थ है — खुले मन से इस ज्ञान को परखने की तैयारी। बिना उस खुलेपन के, यह ज्ञान भी किसी काम नहीं आता।