भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं — तू मुझ पर दोष नहीं लगाता, इसलिए मैं तुझे सबसे गहरा रहस्य बताऊँगा। यह ज्ञान केवल किताबी नहीं है — इसके साथ विज्ञान भी है, यानी भीतरी अनुभव भी।
जैसे किसी बुज़ुर्ग माँ-बाप घर का सबसे कीमती राज़ उसी बच्चे को बताते हैं जो ध्यान से सुने — वैसे ही कृष्ण अर्जुन को यह अमूल्य ज्ञान दे रहे हैं। इस ज्ञान को पाने से व्यक्ति अशुभ बंधनों से मुक्त हो जाता है।