📿 श्लोक संग्रह

इदं तु ते

गीता 9.1 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 9 — राजविद्याराजगुह्ययोग
इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे ।
ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥
इदं
यह
तु
परंतु, किंतु
ते
तुम्हें
गुह्यतमं
सबसे गुप्त
प्रवक्ष्यामि
कहूँगा, बताऊँगा
अनसूयवे
दोष न देखने वाले को
ज्ञानं
ज्ञान
विज्ञानसहितं
अनुभव-सहित
यज्ज्ञात्वा
जिसे जानकर
मोक्ष्यसे
मुक्त हो जाओगे
अशुभात्
अशुभ से, बंधन से

भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं — तू मुझ पर दोष नहीं लगाता, इसलिए मैं तुझे सबसे गहरा रहस्य बताऊँगा। यह ज्ञान केवल किताबी नहीं है — इसके साथ विज्ञान भी है, यानी भीतरी अनुभव भी।

जैसे किसी बुज़ुर्ग माँ-बाप घर का सबसे कीमती राज़ उसी बच्चे को बताते हैं जो ध्यान से सुने — वैसे ही कृष्ण अर्जुन को यह अमूल्य ज्ञान दे रहे हैं। इस ज्ञान को पाने से व्यक्ति अशुभ बंधनों से मुक्त हो जाता है।

अध्याय 9 का यह पहला श्लोक पूरे अध्याय की भूमिका है। अध्याय 7 और 8 में ज्ञान और भक्ति की नींव रखी गई थी — अब 9वें अध्याय में उसका परम रहस्य खुलता है।

कठोपनिषद् में भी कहा गया है कि यह ज्ञान केवल श्रद्धावान को ही मिलता है — अनसूयु (दोषरहित दृष्टि) उसी श्रद्धा का एक रूप है।

अध्याय 9 · 1 / 34
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