यह बड़ी आशावाणी है। नए जन्म में वह योगी पिछले जन्म की बुद्धि और साधना के संस्कार साथ लेकर आता है। वह जन्म से ही उस बिंदु पर होता है जहाँ पिछली बार छोड़ा था। और फिर और अधिक जोर से प्रयास करता है।
जैसे एक बच्चा अपनी माँ की गोद में लौट आता है — नए जन्म में पूर्व-संस्कार ऐसे ही लौट आते हैं। साधना कभी नष्ट नहीं होती — वह अगले जन्म में जारी रहती है।