यह श्लोक कृष्ण का एक बहुत कोमल वचन है। जो मुझे हर जगह देखे — पानी में, आकाश में, माँ के प्रेम में, बच्चे की हँसी में — और सब कुछ मुझमें देखे — उस व्यक्ति को मैं कभी नहीं छोड़ता। और वह भी मुझसे दूर नहीं जाता।
यह द्विपक्षीय प्रेम है। एक ओर भक्त की दृष्टि — सब में कृष्ण। दूसरी ओर कृष्ण का वचन — ऐसे भक्त से मैं कभी छुपता नहीं। यह रिश्ता अटूट है।