यह श्लोक गीता की सबसे संक्षिप्त और सुंदर परिभाषाओं में से एक है। योग क्या है? दुख के संबंध से मुक्ति। जब मन दुख से जुड़ना बंद कर दे — वह योग है। इतनी सरल बात। और यह दृढ़ निश्चय से, बिना थके, बिना ऊबे करना है।
'अनिर्विण्णचेतसा' — यह शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। योग का अभ्यास बार-बार टूटता है, मन भागता है — पर हार नहीं मानना। जैसे एक बच्चा साइकिल सीखता है — गिरता है, फिर उठता है। बिना निराश हुए प्रयास जारी रखना — यही 'अनिर्विण्ण' है।