भगवान कृष्ण यहाँ बहुत स्पष्ट बात कहते हैं — सच्चा संन्यासी वह नहीं जो घर-गृहस्थी छोड़ दे या अग्नि-होम बंद कर दे। सच्चा संन्यासी वह है जो अपना काम करता रहे, पर फल की चाह न रखे। कर्म करना जरूरी है — बस फल की चिंता छोड़नी है।
यह श्लोक उन लोगों के लिए बड़ी राहत की बात है जो सोचते हैं कि योग केवल गुफाओं में बैठने वालों के लिए है। कृष्ण कह रहे हैं — घर में रहो, काम करो, बस मन को फल से मत जोड़ो। यही असली योग है।