कृष्ण कहते हैं — जिनका आत्मज्ञान से अज्ञान नष्ट हो गया है, उनके लिए वह ज्ञान सूर्य की तरह उस परमात्मा को प्रकाशित करता है।
जैसे कमरे में दीपक जलाते ही अँधेरा दूर हो जाता है — वैसे ही जब भीतर ज्ञान का दीपक जलता है, तो परमात्मा का प्रकाश भीतर से ही उगता है। किसी बाहरी रोशनी की ज़रूरत नहीं।