📿 श्लोक संग्रह

ज्ञानेन तु तदज्ञानं

गीता 5.16 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 5 — कर्मसंन्यासयोग
ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः ।
तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥
ज्ञानेन
ज्ञान से
तु
परंतु
तत् अज्ञानम्
वह अज्ञान
येषाम्
जिनका
नाशितम्
नष्ट हो गया
आत्मनः
आत्मा का
तेषाम्
उनके लिए
आदित्यवत्
सूर्य की तरह
ज्ञानम्
ज्ञान
प्रकाशयति
प्रकाशित करता है
तत् परम्
उस परमात्मा को

कृष्ण कहते हैं — जिनका आत्मज्ञान से अज्ञान नष्ट हो गया है, उनके लिए वह ज्ञान सूर्य की तरह उस परमात्मा को प्रकाशित करता है।

जैसे कमरे में दीपक जलाते ही अँधेरा दूर हो जाता है — वैसे ही जब भीतर ज्ञान का दीपक जलता है, तो परमात्मा का प्रकाश भीतर से ही उगता है। किसी बाहरी रोशनी की ज़रूरत नहीं।

यह श्लोक 5.15 का उत्तर है। वहाँ बताया था कि अज्ञान से जीव भटकते हैं — यहाँ बताया कि ज्ञान से वह अज्ञान हट जाता है।

परंपरा में 'आदित्यवत्' उपमा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है — ज्ञान सूर्य की तरह एक साथ सब कुछ प्रकाशित करता है।

अध्याय 5 · 16 / 29
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