कृष्ण एक बहुत सुंदर उदाहरण देते हैं। जो व्यक्ति अपने सारे कर्म परमात्मा को अर्पित करके, बिना आसक्ति के करता है — वह पाप से उसी तरह अछूता रहता है जैसे कमल का पत्ता पानी से।
बच्चे जानते हैं कि कमल कीचड़ में उगता है, पानी में रहता है — पर उस पर पानी की एक बूँद भी नहीं टिकती। बस यही योगी का स्वभाव है। वह दुनिया में रहता है, काम करता है — पर दुनिया उससे चिपकती नहीं।