कृष्ण कहते हैं कि जो मनुष्य मेरे जन्म और कर्म को दिव्य — यानी साधारण नहीं, अलौकिक — समझकर जानता है, वह शरीर छोड़ने के बाद फिर से जन्म नहीं लेता और मुझे ही प्राप्त होता है। यह जानना केवल बौद्धिक नहीं है — यह हृदय से जानना है, जैसे माँ को पता होता है कि उसके बच्चे के रोने का क्या अर्थ है।
यह श्लोक एक बड़ी बात कहता है — भगवान को सच्चाई से जानना मोक्ष का द्वार है। इस जानने में भक्ति, ज्ञान और समर्पण — तीनों शामिल हैं।