एक बहुत सरल और सुंदर उपमा — जैसे जलती हुई प्रचंड अग्नि लकड़ी को राख कर देती है, वैसे ही ज्ञान की अग्नि सारे कर्मों को जला देती है। राख में कोई अंकुर नहीं उगता — कर्म-बन्धन भी ज्ञान के बाद अंकुरित नहीं होता।
यह रूपक सबको समझ आता है — चूल्हे की आग सबने देखी है। कृष्ण ने सबसे गहरी बात सबसे सरल उदाहरण से कही।