कृष्ण अब सबसे बड़ी बात कहते हैं — भौतिक सामग्री से किए गए यज्ञ से ज्ञान-यज्ञ बड़ा है। और समस्त कर्म अंत में ज्ञान में ही समाप्त होते हैं। जैसे सभी नदियाँ अंत में समुद्र में मिलती हैं — वैसे सभी कर्म-मार्ग ज्ञान में मिल जाते हैं।
यह अध्याय का मुख्य विचार है। ज्ञान ही वह बिन्दु है जहाँ कर्म का अंत होता है — बन्धन नहीं, पूर्णता।