कृष्ण कहते हैं — कर्म क्या है और अकर्म क्या है — यह बड़े-बड़े बुद्धिमान लोग भी नहीं समझ पाते। यह विषय इतना गहरा है कि भटकना स्वाभाविक है। लेकिन मैं तुम्हें वह बताऊँगा जिसे जानकर तुम बुराई से मुक्त हो जाओगे।
यह वचन बड़ा सांत्वना देने वाला है — जो बात बुद्धिमानों को भी उलझाती है, उसे स्वयं कृष्ण सरल करके बताएँगे। गुरु का यही काम है — जटिल को सरल बनाना।