कृष्ण कहते हैं कि चार वर्णों की व्यवस्था उन्होंने गुण और कर्म के आधार पर की — जन्म के आधार पर नहीं। जैसे किसी परिवार में कोई खेती करता है, कोई व्यापार, कोई पढ़ाता है — हर कोई अपने स्वभाव और काम से अलग होता है। यह विभाजन प्रकृति का है।
इसके साथ एक गहरी बात भी है — कृष्ण कहते हैं कि मैं इस रचना का कर्ता होते हुए भी अकर्ता हूँ। जैसे वर्षा होती है लेकिन आकाश गीला नहीं होता — ईश्वर सृष्टि करता है लेकिन उसमें बंधता नहीं।