कृष्ण एक अद्भुत कारण-कार्य श्रृंखला बताते हैं — जो योग में नहीं है, उसके पास बुद्धि नहीं; जो योग में नहीं, उसके पास भावना (ध्यान) नहीं; जो ध्यान नहीं करता, उसे शांति नहीं; और जो अशांत है, उसे सुख कहाँ से मिलेगा?
यह श्लोक उलटा पढ़ने पर भी उतना ही गहरा है। सुख के लिए शांति चाहिए, शांति के लिए ध्यान, ध्यान के लिए बुद्धि, और बुद्धि के लिए योग। यह पूरा रास्ता एक साथ जुड़ा है।