अर्जुन कहते हैं — हम यह नहीं जानते कि हमारे लिए क्या बेहतर है — हम उन्हें जीतें या वे हमें जीतें। जिन धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के बाद हम जीना नहीं चाहेंगे, वे ही हमारे सामने युद्धभूमि में खड़े हैं।
अर्जुन की यह बात उनकी गहरी पीड़ा को उजागर करती है। वे जीत भी नहीं चाहते उस जीत को जो उनके अपनों की कीमत पर आए। यह सवाल हर उस इंसान का है जिसे अपनों से ही टकराना पड़े।