कृष्ण कहते हैं कि जो निश्चय कर लेता है, उसकी बुद्धि एक दिशा में केंद्रित हो जाती है। लेकिन जो अनिश्चित है, उसकी बुद्धि अनेक शाखाओं में बँट जाती है — यह करूँ, वह करूँ, यह ठीक है, वह ठीक है।
जैसे एक नदी जब सीधी बहती है तो गहरी और शक्तिशाली होती है। लेकिन जब वह अनेक धाराओं में बँट जाती है, तो हर धारा उथली और कमज़ोर हो जाती है। वैसे ही बुद्धि जब एक लक्ष्य पर टिकती है तो शक्तिशाली होती है।
यह शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है — जो विद्यार्थी एक विषय पर ध्यान लगाता है, वह सफल होता है। जो इधर-उधर भटकता रहता है, वह कहीं नहीं पहुँचता।