कृष्ण आत्मा के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहते हैं — यह न काटी जा सकती, न जलाई, न भिगोई, न सुखाई। यह नित्य है, सर्वव्यापी है, स्थिर है, अविचल है और सनातन है। चारों तत्वों — पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु — में से कोई भी आत्मा को नष्ट नहीं कर सकता।
यह श्लोक बच्चों को भी आसानी से समझाया जा सकता है। जैसे हवा को पकड़ा नहीं जा सकता, आग उसे जला नहीं सकती — वैसे ही आत्मा किसी भी भौतिक शक्ति की पहुँच से परे है।