📿 श्लोक संग्रह

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि

गीता 2.23 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 2 — सांख्ययोग
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥
न एनम्
इसे नहीं
छिन्दन्ति
काटते
शस्त्राणि
शस्त्र
दहति
जलाती
पावकः
अग्नि
क्लेदयन्ति
गीला करता
आपः
जल
शोषयति
सुखाती
मारुतः
वायु

कृष्ण आत्मा की अमरता को और स्पष्ट करते हैं — इस आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग जला सकती है, न पानी गीला कर सकता है, न हवा सुखा सकती है।

प्रकृति के चारों तत्व — पृथ्वी (शस्त्र), अग्नि, जल और वायु — कोई भी आत्मा को छू नहीं सकता। यह बात समझने के लिए सोचिए — क्या आप अंधेरे को तलवार से काट सकते हैं? क्या प्रकाश को पानी में डुबो सकते हैं? जो अभौतिक है, उस पर भौतिक शक्तियों का कोई प्रभाव नहीं।

यह श्लोक योद्धा अर्जुन के लिए विशेष रूप से कहा गया है — तुम्हारे बाण किसी की आत्मा को नहीं मार सकते।

यह गीता के सबसे प्रसिद्ध श्लोकों में से एक है। चारों महाभूतों — पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु — का उल्लेख करके कृष्ण ने आत्मा की पूर्ण अभेद्यता सिद्ध की है।

इस श्लोक का उपयोग भारतीय दर्शन में आत्मा के अभौतिक स्वरूप को समझाने के लिए सदियों से किया जाता रहा है।

अध्याय 2 · 23 / 72
अध्याय 2 · 23 / 72 अगला →