कृष्ण कहते हैं — हे पार्थ, जो इस आत्मा को अविनाशी, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है — वह पुरुष किसे मारता है और किसे मरवाता है? यह प्रश्न-रूप में दिया गया उत्तर है — जो ज्ञानी है, वह जानता है कि न वह कोई मारता है, न कोई मरता है।
यह विचार कठिन लगता है, लेकिन इसका सार सरल है। जैसे नाटक में पात्र मरते हैं लेकिन अभिनेता नहीं मरता — वैसे ही शरीर नष्ट होता है पर आत्मा नहीं। जो यह जानता है, उसके लिए हत्या और मृत्यु का अर्थ ही बदल जाता है।