कृष्ण कहते हैं — जो सोचता है कि आत्मा किसी को मारती है, और जो सोचता है कि आत्मा मारी जाती है — वे दोनों अज्ञानी हैं। आत्मा न मारती है, न मारी जाती है।
यह ऐसा है जैसे आईने में दिखता चेहरा — आईना टूट जाए तो क्या चेहरा टूट गया? नहीं। शरीर आईने की तरह है, आत्मा चेहरे की तरह — शरीर नष्ट हो, आत्मा को कुछ नहीं होता।
अर्जुन डर रहे थे कि युद्ध में वे अपने गुरुओं और बंधुओं को 'मार' देंगे। कृष्ण कह रहे हैं — तुम किसी को मार ही नहीं सकते, क्योंकि आत्मा अमर है।