कृष्ण कहते हैं — जो असत् है उसकी कोई सत्ता नहीं; जो सत् है उसका कोई अभाव नहीं। इन दोनों का यह निष्कर्ष तत्वदर्शियों ने देखा है। यह गीता के सबसे गहरे दार्शनिक वचनों में से एक है।
आसान शब्दों में — शरीर बदलता है, इसलिए वह असत् है; आत्मा कभी नहीं बदलती इसलिए वह सत् है। शरीर के नाश का शोक नहीं करना चाहिए क्योंकि जो सच में है — वह कभी नष्ट नहीं होता।